Sunday, March 1, 2020

,शीर्षक

लो फरवरी आ गया
मन पतँग सा लहराया
   हाँड  मास गलाकर शीत 
ने कहर ढाया।
सूर्य तब धीरे धीरे चलकर  उत्तरायण मे आया।
गरम  गुनगुनी धूप के साथ खुले द्वार घरों के
जन.जीवन मस्त.हो 
उतर आया सडको पे।
पी पी पी पी करता 
गुब्बारे वाला  फेरी लगाने.लगा।
रँग बरँगे गुब्बारो से 
बच्चों क़ो लुभाने  लगा।
कठपुतली वाले ने भी 
कया रँग जमाया
 हवा मे उडाकर गुलाबो 
सिताबो.को खुब भिडाया।
बन्दर  वाला  भी डमरु लेकर आ गया,
भरी भीड मे एक लडके को देवर बना
बन्दरिया को भौजाई बना गया।
अम्मा भी आँगन मे जोडो पर तेल मलने लगी,
खटोले पर पलट पलट शिशु करतब दिखाने.लगा,
अडोस पडोस कि चाचियोँ ने चबूतरे पर आसन जमाया,
गुण कि चाय की.चुस्कियों  का आनन्द उठाया।
सोँधी खुशबू तिल गुण और     लइया गजक की लुभाने लगी,
फगुवा खेलने को गोरिया  कान्हा सँग तरसाने लगी।।
सरसो भी पट गयी खेतोँ  मे,
चिडियाँ फुरफुराने लगीं।
रँग बिरँगे फूल झाडियौँ मे से झाकने लगे।
हृदयों मे नवस्फूरती का हुआ अहसास।
सूरज एसा सतरँगी प्रकाश लाया किभारी रजाई छोड,
जन जन हल्के दोहर मे गरमाया।
लो फरवरी आ गया,
मन पतँग सा हवा मे लहराया ।।

नमिता राय

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